सोने और चांदी में गिरावट और गहरी हुई, क्योंकि रैली की रफ़्तार फीकी पड़ गई

By: rick adams

On: Monday, February 2, 2026 10:36 AM

सोने और चांदी में गिरावट और गहरी हुई, क्योंकि रैली की रफ़्तार फीकी पड़ गई

2026 की शुरुआत में वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में उस समय हलचल मच गई जब सोने और चांदी की कीमतों में तेज़ गिरावट दर्ज की गई। लंबे समय से लगातार बढ़त बना रही कीमती धातुओं की रैली अचानक ठंडी पड़ती दिखी। निवेशक, जो हाल के महीनों में सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर बड़ी संख्या में इसमें पैसा लगा रहे थे, अब कीमतों में आई तेज़ गिरावट देखकर सतर्क हो गए हैं। सोमवार को सोने की कीमत में लगभग 7.8 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई और यह घटकर 4,515 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गई, जबकि चांदी की कीमत में तो और भी ज़्यादा, करीब 14.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 73 डॉलर तक फिसल गई।

यह गिरावट इसलिए भी चौंकाने वाली रही क्योंकि इससे पहले कीमती धातुएँ ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर पहुँच चुकी थीं और बाज़ार में यह धारणा बन गई थी कि यह रैली लंबे समय तक जारी रह सकती है। लेकिन वित्तीय बाज़ारों में अक्सर ऐसा होता है कि तेज़ उछाल के बाद मुनाफ़ावसूली और नीति से जुड़ी खबरें कीमतों की दिशा बदल देती हैं।

फेड चेयर के नामांकन से बदला निवेशकों का मूड

कीमती धातुओं की कीमतों में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के चेयर पद के लिए केविन वार्श का नामांकन माना जा रहा है। शुक्रवार को जैसे ही यह खबर सामने आई, सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा। निवेशक वार्श को अपेक्षाकृत अधिक पारंपरिक और सख्त मौद्रिक नीति का समर्थक मानते हैं। इसका मतलब यह लगाया जा रहा है कि भविष्य में ब्याज दरों और मौद्रिक फैसलों में ज़्यादा अनुशासन देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपनाते हैं या ऐसा संकेत देते हैं, तो सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो जाता है। यही कारण है कि जैसे ही फेड चेयर के नाम को लेकर स्पष्टता आई, बाज़ार में मौजूद सट्टा गतिविधियाँ धीमी पड़ीं और कीमतों में तेज़ गिरावट देखने को मिली।

सट्टा निवेश और मुनाफ़ावसूली ने बढ़ाया दबाव

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के नॉर्थ एशिया क्षेत्र के मुख्य निवेश अधिकारी रेमंड चेंग के अनुसार, हाल के महीनों में सोने की कीमतों में तेज़ उछाल के पीछे बड़ी मात्रा में सट्टा निवेश भी शामिल था। जब कीमतें बहुत तेज़ी से ऊपर जाती हैं, तो बाज़ार में ऐसे निवेशक बढ़ जाते हैं जो अल्पकालिक मुनाफ़े के लिए खरीदारी करते हैं।

केविन वार्श के नामांकन की घोषणा के बाद यही सट्टा निवेशक सबसे पहले मुनाफ़ा निकालने लगे, जिससे बिकवाली का दबाव अचानक बहुत बढ़ गया। इसका असर यह हुआ कि कीमतें एक झटके में नीचे आ गईं और रैली की रफ़्तार फीकी पड़ गई।

वैश्विक शेयर बाज़ारों में भी कमजोरी

कीमती धातुओं में गिरावट के साथ-साथ वैश्विक शेयर बाज़ारों में भी कमजोरी देखी गई। एशियाई बाज़ारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा और इसमें करीब 4.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि निवेशकों का जोखिम लेने का मनोबल कमजोर हुआ है।

अमेरिकी शेयर बाज़ारों की बात करें तो S&P 500 और नैस्डैक 100 को ट्रैक करने वाले फ्यूचर्स क्रमशः 1 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत नीचे आ गए। यूरोप में भी हालात कुछ बेहतर नहीं रहे और स्टॉक्स यूरोप 600 से जुड़े फ्यूचर्स में लगभग 0.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। जब शेयर बाज़ार और कीमती धातुएँ दोनों एक साथ गिरते हैं, तो यह आमतौर पर वैश्विक अनिश्चितता और नीति से जुड़ी चिंताओं की ओर इशारा करता है।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर

सोमवार को अमेरिकी डॉलर में हल्की मजबूती देखने को मिली और यह अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की मुद्राओं के मुकाबले 0.1 प्रतिशत मजबूत हुआ। आमतौर पर डॉलर के मजबूत होने पर सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ता है, क्योंकि ये धातुएँ डॉलर में ही मूल्यांकित होती हैं।

वहीं दूसरी ओर, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड की यील्ड में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 4.22 प्रतिशत पर आ गई। बॉन्ड यील्ड और कीमतें एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चलती हैं, इसलिए यील्ड में यह बदलाव निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

कीमती धातुओं की रैली की असली वजह क्या थी

अगर पीछे देखें, तो सोने और चांदी में हालिया तेज़ उछाल की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज़ कर दिया गया था। इसके बाद कई केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की खरीद बढ़ा दी।

इसके अलावा, निजी निवेशकों की तरफ़ से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और भौतिक सोने की मांग भी तेज़ी से बढ़ी। विकसित देशों में बढ़ते सरकारी खर्च, बढ़ते कर्ज़ और भू-राजनीतिक तनावों ने भी सोने को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में और मज़बूत किया।

क्या गिरावट के बावजूद सोना अब भी आकर्षक है

हालाँकि हालिया गिरावट ने निवेशकों को चौंकाया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ अब भी सोने को लंबी अवधि के लिए एक अच्छा विकल्प मानते हैं। रेमंड चेंग का कहना है कि अगर सोना 4,650 डॉलर के आसपास ट्रेड करता है, तो यह अनिश्चित आर्थिक माहौल में इसमें निवेश बढ़ाने का एक अवसर हो सकता है।

उनका मानना है कि अमेरिका में सरकारी खर्च और राजकोषीय नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है। इसके अलावा, राजनीतिक जोखिम भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुए हैं, जिससे सोने की दीर्घकालिक मांग बनी रह सकती है।

सोना खनन कंपनियों के शेयर भी दबाव में

कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का असर सीधे तौर पर सोना खनन कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा। ऑस्ट्रेलिया में सूचीबद्ध न्यूमोंट कॉरपोरेशन के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि ज़िजिन गोल्ड इंटरनेशनल के शेयर लगभग 5.6 प्रतिशत फिसल गए। जब सोने की कीमत गिरती है, तो खनन कंपनियों की आय और मुनाफ़े को लेकर भी निवेशकों की चिंताएँ बढ़ जाती हैं।

निष्कर्ष

सोने और चांदी में आई यह तेज़ गिरावट भले ही डराने वाली लगे, लेकिन यह बाज़ार के स्वाभाविक चक्र का हिस्सा भी हो सकती है। रिकॉर्ड रैली के बाद सुधार आना असामान्य नहीं है। फेडरल रिज़र्व से जुड़े घटनाक्रम, वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों की मानसिकता आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों के लिए ज़रूरी है कि वे भावनाओं में बहने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण और सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी को निवेश, वित्तीय या कानूनी सलाह के रूप में न लें। कीमती धातुओं की कीमतें और बाज़ार की स्थितियाँ समय के साथ बदल सकती हैं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों या योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना उचित रहेगा।

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