Delhi Metro का डबल-डेकर धमाका! डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के परिवहन ढांचे में इस साल एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (DMRC) द्वारा बनाए जा रहे डबल-डेकर वायाडक्ट अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं। यह आधुनिक संरचना सड़क और मेट्रो दोनों के लिए अलग-अलग स्तर प्रदान करेगी। इन वायाडक्टों के निर्माण से शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में आवागमन को नई राहत मिलने की उम्मीद है। निचले स्तर पर सड़क यातायात और ऊपरी स्तर पर मेट्रो ट्रेनें चलेंगी, जिससे दिल्लीवासियों को समय की बचत के साथ सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।
दिल्ली का पहला डबल-डेकर वायाडक्ट भजनपुरा और यमुना विहार मेट्रो स्टेशनों के बीच मौजपुर–मजलिस पार्क कॉरिडोर पर तैयार हो चुका है। इस वायाडक्ट पर मेट्रो ट्रेनें संचालन के लिए सक्षम हैं। हालांकि, सड़क यातायात के लिए रैंप का निर्माण अभी जारी है, जिसे इस वर्ष पूरा किए जाने की संभावना है। इसके अलावा आजादपुर और अशोक विहार मेट्रो स्टेशनों के बीच दूसरा डबल-डेकर वायाडक्ट भी इसी साल तैयार होने की उम्मीद है। तीसरे डबल-डेकर वायाडक्ट का निर्माण नई गोल्डन लाइन पर तेजी से चल रहा है।
DMRC के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में कुल तीन डबल-डेकर वायाडक्ट बनाए जा रहे हैं, जिन्हें दिल्ली सरकार के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इन संरचनाओं में निचले स्तर पर वाहन चलेंगे, जबकि ऊपरी स्तर पर मेट्रो ट्रेनें दौड़ेंगी। इस आधुनिक तकनीक से न केवल सड़क पर वाहनों की संख्या संतुलित होगी, बल्कि मेट्रो यातायात भी अधिक सुविधाजनक और तेज़ होगा।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली की तस्वीर बदलेगा पहला प्रोजेक्ट
भजनपुरा–यमुना विहार डबल-डेकर वायाडक्ट 1.4 किलोमीटर लंबा है और यह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरता है। यह 12.3 किलोमीटर लंबे मौजपुर–मजलिस पार्क कॉरिडोर का हिस्सा है, जो पिंक लाइन का विस्तार है। DMRC अधिकारियों के अनुसार, इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, ट्रायल रन जारी हैं और मेट्रो रेल सेफ्टी कमिश्नर (CMRS) द्वारा निरीक्षण भी हो चुका है।
सड़क हिस्से के लिए रैंप का निर्माण पहले पेड़ों की कटाई की अनुमति न मिलने के कारण रुका हुआ था। लेकिन अब अनुमति मिलने के बाद इसे दोबारा शुरू कर दिया गया है और अधिकारियों का कहना है कि इसे इसी वर्ष पूरा कर लिया जाएगा। पिंक लाइन के चालू होने के बाद यह DMRC नेटवर्क की पहली सर्कुलर लाइन बन जाएगी। इसका मतलब है कि यात्री लंबी दूरी तय करने के लिए लाइन बदलने की झंझट से बचेंगे और समय की बचत भी होगी।
मैजेंटा और गोल्डन लाइन पर भी काम तेज
दिल्ली मेट्रो की दूसरी डबल-डेकर परियोजना 2.2 किलोमीटर लंबा है और यह जनकपुरी वेस्ट–आरके आश्रम मार्ग कॉरिडोर पर बनाया जा रहा है। यह मैजेंटा लाइन का विस्तार है। इस कॉरिडोर पर रैंप सेक्शन में फाउंडेशन का काम और स्वतंत्र फ्लाईओवर हिस्से में गर्डर लगाने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना भी इसी वर्ष पूरी हो जाएगी। हालांकि, पूरा 29.3 किलोमीटर लंबा आरके आश्रम–जनकपुरी वेस्ट कॉरिडोर अगले वित्त वर्ष में चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा।
तीसरी और सबसे लंबी 2.4 किलोमीटर की डबल-डेकर संरचना संगम विहार और आंबेडकर नगर के बीच बन रही है। यह 23.6 किलोमीटर लंबे तुगलकाबाद–एयरोसिटी कॉरिडोर यानी गोल्डन लाइन का हिस्सा है। यहां मेट्रो पिलर और वायाडक्ट के स्पैन का निर्माण तेजी से चल रहा है। इन तीनों डबल-डेकर वायाडक्टों के पूरा होने से न केवल यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि दिल्ली के भारी यातायात वाले इलाकों में भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।
फेज-IV विस्तार: दिल्ली मेट्रो की नई दिशा
DMRC के फेज-IV विस्तार के तहत कुल 112.4 किलोमीटर लंबाई के छह नए कॉरिडोर और 94 नए स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें से तीन प्राथमिक कॉरिडोर ऐसे हैं जिनमें डबल-डेकर वायाडक्ट शामिल हैं। इसी चरण में 8.3 किलोमीटर लंबा साकेत जी-ब्लॉक–लाजपत नगर कॉरिडोर भी शामिल है, जो गोल्डन लाइन का विस्तार होगा। इस कॉरिडोर पर निर्माण कार्य 8 दिसंबर से शुरू हो चुका है।
दिल्ली मेट्रो इस मार्ग पर देश की पहली तीन-कोच ट्रेन सेवा भी शुरू करने जा रही है। इसे खास तौर पर कम दूरी की शहरी यात्राओं के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह दक्षिण दिल्ली के लिए एक अहम संपर्क मार्ग साबित होगा। इसके अलावा इंदरलोक–इंद्रप्रस्थ (ग्रीन लाइन विस्तार) और रिठाला–नरेला–कुंडली (रेड लाइन विस्तार) कॉरिडोरों पर भी इस साल निर्माण कार्य शुरू होने की योजना है।
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फेज-IV के तहत तीन अतिरिक्त कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इनमें आरके आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ, तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज, और एयरोसिटी से टर्मिनल-1 कॉरिडोर शामिल हैं। इन नए कॉरिडोरों के निर्माण के साथ दिल्ली मेट्रो नेटवर्क और अधिक व्यापक और आधुनिक होगा।
सड़क और मेट्रो यातायात में संतुलन
डबल-डेकर वायाडक्टों के निर्माण से दिल्लीवासियों को कई फायदे होंगे। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह सड़क और मेट्रो दोनों यातायात को अलग स्तर प्रदान करेगा, जिससे ट्रैफिक जाम कम होगा और लोगों का समय बचेगा। साथ ही, यह परियोजना शहर की सफाई और सड़क सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी। ट्रैफिक की भीड़भाड़ कम होने से वायु प्रदूषण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
अधिकारियों का कहना है कि ये वायाडक्ट भविष्य में और भी आधुनिक तकनीक के लिए मार्ग प्रशस्त करेंगे। जैसे-जैसे शहर का विस्तार होगा, इन वायाडक्टों के माध्यम से न केवल मेट्रो नेटवर्क मजबूत होगा बल्कि सड़क यातायात भी नियंत्रित किया जा सकेगा। यह परियोजना दिल्लीवासियों के लिए एक बड़ा परिवर्तन लेकर आएगी और शहर की आधारभूत संरचना को और अधिक विकसित बनाएगी।
निष्कर्ष:
दिल्ली में डबल-डेकर वायाडक्टों का निर्माण शहर के यातायात ढांचे में एक नई क्रांति साबित होगा। पिंक, मैजेंटा और गोल्डन लाइनों पर यह परियोजना न केवल आवागमन को सरल और तेज बनाएगी, बल्कि शहर की भीड़भाड़ और प्रदूषण को भी कम करने में मदद करेगी। फेज-IV के तहत नए कॉरिडोर और डबल-डेकर वायाडक्ट दिल्लीवासियों के लिए भविष्य में सुरक्षित, समय बचाने वाला और आधुनिक परिवहन का नया अनुभव लाएंगे।
FAQs
Q. डबल-डेकर वायाडक्ट क्या है?
A. डबल-डेकर वायाडक्ट एक ऐसी संरचना है जिसमें निचले स्तर पर सड़क यातायात और ऊपरी स्तर पर मेट्रो ट्रेन चलती है।
Q. दिल्ली में कितने डबल-डेकर वायाडक्ट बन रहे हैं?
A. दिल्ली में कुल तीन डबल-डेकर वायाडक्ट बनाए जा रहे हैं।
Q. पहला डबल-डेकर वायाडक्ट कहाँ तैयार हो चुका है?
A. भजनपुरा–यमुना विहार मेट्रो स्टेशनों के बीच मौजपुर–मजलिस पार्क कॉरिडोर पर पहला वायाडक्ट तैयार है।